योग द्वारा जीवन जीने की कला || The art of living life through yoga.

योग द्वारा जीवन जीने की कला

      लोगों ने योग का अर्थ केवल व्यायाम,  योगासन, प्राणायाम या शारीरिक क्रिया को समझ रखा है। लेकिन अगर हम योग की गहराई को समझे और उसका वास्तविक अर्थ निकाले तो हम इसे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बना लेते हैं। योग से हम मात्र शारीरिक, मानसिक व भौतिकता ही प्राप्त नहीं करते वरन अपने जीवन की राह को सुखी और समृद्धि पर पूरे परिवार को संपूर्ण लक्ष्य दे सकते हैं, एवं आध्यात्मिक के चरम शिखर को छू सकते हैं।

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Art of living

        मैं जब भी कोई योग शिविर लगाता हूं तो अपने सभी साधकों को योग के साथ-साथ उनके जीवन के उत्थान के लिए प्रेरित भी करता हूं। मैं योग के साथ साथ जीने की कला भी सिखाता हूं, ताकि साधक इसे आत्मसात कर सके।

       जैसा हम सोचते हैं शरीर में वैसा ही घटित होता है। उदाहरण के तौर पर हम देखते हैं कि जैसे ही हमें क्रोध आता है तो हमारे हाव-भाव वैसे ही होने लगते हैं। भौहे तन जाती हैं, रक्त संचार बढ़ जाता है, मांसपेशियां खिंच जाती है,  शरीर में एकत्रित ऊर्जा अनावश्यक रूप से नष्ट हो जाती है । जिससे मानसिक तनाव बढ़ जाता है। अपने आसपास का वातावरण भी खराब हो जाता है तथा लोगों के सामने हमारी छवि बिगड़ जाती है और नकारात्मकता प्रवेश हो जाता है।

         क्रोध करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हैं। जिससे शरीर जल्द ही कमजोर हो जाता है और आसानी से रोग ग्रस्त हो जाता है। जीवन में हमारे साथ कई बातें घटित होती है। हम शारीरिक व मानसिक रोग से ग्रस्त व आर्थिक रूप से भी कमजोर हो जाते हैं।

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योग क्या करता है || What happens with yoga?

       कई बार गलत आदतें भी पड़ जाती है, जैसे नशे की लत, इससे दमकते चेहरे भी मुरझा जाते हैं। हम आहार लेते हैं लेकिन शरीर पर उसका सकारात्मक असर नहीं दिखता। दिनों दिन हालत खराब होती जाती है। परिवार टूट जाता है। बच्चे संस्कारवान नहीं बन पाते, समाज तिरस्कार भरी दृष्टि से देखने लगता है, इससे हम उपेक्षा के शिकार हो जाते हैं।  संसार से उब जाते हैं तथा जीवन अर्थहीन लगने लगता है। सुबह से शाम तक चिंता सताती है हम रात्रि में नींद भी नहीं आती जिससे जीवन दवाइयों के सहारे चलता है। चारों और निराशा नजर आती हैं
        तो हम इसलिए पैदा हुए हैं तो क्या हम बाकी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएंगे
        कौन कहता है कि तुम कुछ नहीं कर पाओगे? कौन कहता है , तुम कुछ नहीं हो?

       आप बहुत कुछ हो! आप आज भी वैसे हो, तुम अनंत शक्तियों के पुंज हो, तुम्हारी आत्मा में कोई अपना दोष नहीं है, जो भी अवगुण आए हैं वह सब बाहर से आए हैं और बाहर ही छूट जाएंगे, तुम्हारे अंदर अनंत ज्ञान है, तुम सच्चे इंसान हो तुम्हारे अंदर बहुत सारी चेतनाएं हैं, उन्हें विकसित करो, तुम्हारे अंदर सुख का भंडार हैं, उठो! पूरे जोश के साथ उठो! अच्छा करने लगो, मत देखो जमाने को जमाना तुम्हारा साथ तब देगा, जब तुम उनको अपने विश्वास में ले लोगे।

        तुम अकेले ही संघर्ष करो, तुम्हारे साथ अदृशय शक्ति  हैं, तुम्हारे पूर्वजों की किरणें हैं, अभी प्रण लो अभी से तुम्हारे अंदर नई चेतना का प्रादुर्भाव होगा।

        कसम खा लो कि आज से नए जीवन की शुरुआत करूंगा, विरोध नहीं करूंगा,  मांसाहार का सेवन बिल्कुल नहीं करूंगा, नशा नहीं करूंगा, अपशब्द नहीं बोलूंगा, अहंकार का त्याग करता हूं, माया से मुक्ति चाहता हूं, और लोभ को छोड़ता हूं।

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Yoga

        अब मैं अपनी शुद्धता के साथ ही जीवन यापन करूंगा।  मैं सब से प्रेम करूंगा।  किसीसे कोई अपेक्षा नहीं करूंगा। ऐसा करने पर आप देखोगे कि आपके चारों और शांति ही शांति है। शुद्ध वातावरण है।  आपका मान सम्मान बढ़ गया है।  आप मुस्कुराते हैं तो आपको देखकर पूरा विश्व मुस्कुराता है।

      कुछ दिनों बाद आप देखोगे कि तुम्हारा शरीर पहले से बहुत अच्छा हो गया है।  मानसिक रूप से आप अधिक स्वस्थ हो गए हैं। आप स्वयं की और दूसरों की नजरों में ऊपर उठ गए हैं। आप हर प्रकार से अच्छे हो गए हैं।

      यह छोटा सा उदाहरण देने का हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि हम जैसा सोचते हैं। हमारे इस शरीर में वैसे ही रासायनिक तत्वों का निर्माण होने लगता है।  हमारी सोच अच्छी होगी तो अच्छे रसायनों का निर्माण होगा, जो कि हमें इस समय से लेकर मृत्यु पर्यंत हर प्रकार की पोषणता प्रदान करेंगे, तो क्यों ना हम आज से ही सब कुछ बदलने।  यम- नियम को अपने जीवन में उतार लें।

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जीवन निर्माण में गुरु की भूमिका || Role of Guru in building life

       हमारा शरीर ब्रह्मांड की अभिव्यक्ति है जो तथ्य एवं शक्तियां इस ब्रम्हांड का निर्माण करती है। वही हमारे शरीर मस्तिक और सूक्ष्म शरीर का भी निर्माण करती हैं। आप और हम देखते हैं कि प्रकृति का वातावरण असंतुलित हो रहा है, जिस कारण से हमारा ब्रह्मांड भी बीमार हो गया है। एवं जहां-तहां प्राकृतिक विपदा ही दिखाई दे रही हैं।

       इसी प्रकार यदि हमारा खान-पान, रहन-सहन भी असंतुलित होगा तो यह शरीर तथा मस्तिष्क भी असंतुलित हो जाएगा।  इसलिए संतुलित जीवन जीये। हमें अपने जीवन जीने का अंदाज बदल कर बात कर हम इस जीवन को सफल एवं सुंदर बना सकते हैं।

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