चित्त की भूमियां ओर चित्त की वृत्तियों के प्रकार तथा व्याख्या।। chitt ki vritti chitt ki bhumiyan

 

चित्त भूमिया कितने प्रकार की होती हैं? तथा चित्त की वृत्तियाँ कितने प्रकार की होती है।

chitt ki vritti chitt ki bhumiyan

चित्त की भूमियां ओर चित्त की वृत्तियों के प्रकार तथा व्याख्या।। chitt ki vritti chitt ki bhumiyan
चित्त की भूमियां


योग दर्शन में चित्त की 5 अवस्थाओं का वर्णन किया गया है जिन्हें पंच भूमियां कहा जाता है।

1. क्षिप्तावस्था
2. मूढावस्था
3. विक्षिप्तावस्था
4. एकाग्रतावस्था
5. निरुधवस्था


1. क्षिप्तावस्था:- इस अवस्था में मनुष्य भोग – विलास में लिप्त रहता है । इस अवस्था में रजोगुण प्रधान रहता है। मनुष्य में राग -द्वेष , मोह, हिंसा, दुख ,आदि उत्पन्न होते हैं। यह मनुष्य के नैतिक पतन का कारण बनती है।


2. मूढावस्था:- इस आस्था में मनुष्य आलस, निंद्रा के प्रभाव में रहता है। इस अवस्था में तमोगुण प्रधान रहता है। इसमें मनुष्य लोभ, आलस, भ्रम आदि विकारों में रहता है। मनुष्य अनैतिक तथा अधर्म कार्य करता हुआ अपना जीवन अज्ञानता में व्यतीत करता है।


3. विक्षिप्तावस्था:- इस आवस्था में सतोगुण प्रधान रहता है। इस अवस्था में उत्साह, प्रसंता, सुख, आदि गुण उत्पन्न होते हैं।  इसमें व्यक्ति समाधि की अवस्था में जा सकता है। परंतु रजोगुण के प्रभाव से मन में उत्पन्न होने वाली चंचलता अध्यात्म की ओर जाने से रोकती हैं।


4. एकाग्रतावस्था:- इस अवस्था में सतोगुण पूर्व प्रधान रहता है। एकाग्रता अवस्था के दौरान व्यक्ति पूर्ण रूप से निर्मल तथा स्वस्थ रहता है। यह अवस्था साम्प्रज्ञात समाधि भी कहलाती हैं।


5.निरुधवस्था:- यह अवस्था  सिद्ध योगियों की होती हैं। इस आवस्था में किसी भी प्रकार का विशेष नहीं रह जाता। इसमें संस्कार ही शेष रह जाते हैं। इसे शून्यता की स्थिति भी कहा जाता है।


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चित्त वृत्तियाँ

पतंजलि योग सूत्र के अनुसार चित्तवृत्ति या पांच प्रकार की होती है–
1. प्रमाण वृत्ति
2. विपर्यय वृत्ति
3. विकल्प वृत्ति
4. निंद्रा वृत्ति
5. स्मृति वृत्ति


1. प्रमाण वृत्ति:- वास्तविक घटनाओं का ज्ञान कराने वाली वृत्ति प्रमाण वृत्ति हैं। यह तीन प्रकार की होती है। प्रत्यक्ष, आनुमान, आगम।


2. विपर्यय वृत्ति:- मिथ्या ज्ञान को विपर्यय वृत्ति कहा जाता है । किसी घटना के बारे में गलत ज्ञान होना ही  विपर्यय वृत्ति हैं।


3. विकल्प वृत्ति:- किसी वस्तु के उपस्थित नहीं होने पर भी उस वस्तु के होने का ज्ञान या कल्पना करना ही विकल्प वृति है।


4. निंद्रा वृत्ति:– जब ज्ञान का अभाव होता है , तथा व्यक्ति का संबंध बाह्य जगत से टूट जाता है । निंद्रा वृत्ति होती है।


5. स्मृति वृत्ति:- पूर्व में अनुभव किए गए संस्कारों तथा विषयों का बार-बार स्मरण होना है स्मृति वृत्ती है।


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