Joint Pain Yoga- ये 4 आसन दिलाएंगे जोड़ों के दर्द से मुक्ति

 

ये 4 आसन दिलाएंगे जोड़ों के दर्द से मुक्ति


        हेलो दोस्तों, आज मैं आपको पांच ऐसे योगासनों के बारे में बताने जा रहा हूं जो जोड़ों के दर्द से हमें मुक्ति दिलाने में सफल होंगे आज के समय में ज्वाइंट पेन की समस्या बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है जॉइंट पेन की समस्या हमारे युवा भाइयों में भी बहुत देखी जा रही है जिसके लिए योगासन तो बहुत है लेकिन आज के इस ब्लॉग में मैं सिर्फ आपको 5 योगासनों के बारे में ही बताऊंगा जो ज्वाइंट पेन के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होंगे तो चलिए देखते हैं इन पांच आसनों के बारे में-

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सेतुबंधासन:-


शाब्दिक अर्थ:-

        सेतु का अर्थ होता है फुल सेतुबंध आसन का अर्थ ऐसा आसान है जिसकी आकृति एक पुल के समान हैं ।

विधि:-

           सवासन अर्थात पीठ के बल लेट जाएं। शरीर के बीच के भाग को सिर और पैरों के पंजों के बल उठाना है। अतः पहले श्वास लें फिर शरीर के प्रति सजग रहें। अब धीरे-धीरे शरीर के मध्य भाग को उठाएं । नए साधक अपने हाथों का सहारा लें। अपने हाथों को या तो सिर के पीछे ले जाएं और हाथों को बल देते हुए शरीर को उठाएं या फिर कमर और पीठ के भाग को हाथों से उठाए। अभ्यास हो जाने पर हाथों को नमस्कार की मुद्रा में लाए या हाथों को पेट के ऊपर रखकर बांध ले या हाथों को जघंओ के ऊपर रख ले। ध्यान रखें पांव का तलवा पूरा जमीन से चिपका रहे । आसन की अवस्था में सांस रोके वापस आते समय सांस छोड़ें।

लाभ:- 

  • गर्दन के विकार दूर होते हैं ।
  • ग्रीवा पुष्ट होती है।

  • ग्रंथियां पीयूष ग्रंथि पुष्टी होती हैं।

  • पाचन संस्थान का लाभ मिलता है।


 सावधानी:- 

  •  योग्य शिक्षक की देखरेख में करें ।
  • उच्च रक्तचाप वाले रोगी इस आसन को न करें तथा सिर के नीचे मोटा करें कंबल रखें।

ताड़ासन:-

 

ताड़ासन

विधि:-

         पैरों को एक साथ मिलाकर सावधान अवस्था की स्थिति में खड़े हो। परंतु अंगूठे और एड़ियां समांतर ही रखें जब पंजो पर जोर देते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठे और दोनों हाथों को मिलाकर  ऊपर की तरफ खींचे। ध्यान दें इस अवस्था में घुटने एवं जांघों की मांसपेशियों को ऊपर की तरफ खींचे पेट को यथासंभव अंदर करें सीने को आगे करें सिर और गर्दन को सीधा रखें


        सिर्फ पंजो पर रखें कुछ देर इसी अवस्था में रुके वापस आते समय सांस छोड़ते हुए मूल स्थिति में आ जाए

 श्वास क्रम:-

  •  उठते समय श्वास लें और वापस आते समय सांस छोड़ें
  •  समय 5 से 6 बार करें 4 से 2 मिनट तक करें

 लाभ:-

  •  लंबाई बढ़ाने का सबसे अच्छा व्यायाम  है
  •  शरीर को स्फूर्ति देता है
  •  घुटनों के दर्द में लाभ देता है
  •  मांसपेशियां मजबूत करता है
  •  सिर्फ डिस्क वाले यह आसन अवश्य करें
  •  स्त्रियों के लिए लाभकारी है खासतौर पर गर्भवस्था में शुरुआती महीनों में इसके लिए विशेष लाभकारी है
  • शंख प्रक्षालन क्रिया के लिए आवश्यक हैं

शशांकासन:-


शशांकासन


 विधि:-

      वज्रासन में बैठ जाए सांस लेते हुए दोनों हाथों को कान के बगल से सटाते हुए, सिर के ऊपर उठाएं। बाहय कुंभक करें  और सांस छोड़ते हुए सिर वह दोनों हाथों को एक साथ सामने की तरफ जमीन पर मिलाएं। बाह्य कुम्भक  करें  फिर श्वाश लेते हुए हाथ  व  सिर को ऊपर उठाएं ।  श्वाश छोड़ते हुए मूल  अवस्था में आ जाएं श्वाश के प्रति सजग रहें

 समय :-

  •  यह क्रिया 10 से 12 बार करें स्वास्थ क्रम विधि में समाहित है

 लाभ:-

  •  यह आसन उदर संबंधी विकारों से छुटकारा दिलाता है 
  •  मेरुदंड के विकार दूर होते हैं 
  •  रक्त संचार प्रणाली को चालू करता है
  •   मानसिक विकार दूर करता है
  •  प्रजनन के विकारों को दूर करता है

 सावधानी:-

  •  अति उच्च रक्तचाप वाले इस आसन को न करें

वीरभद्रासन:-


वीरभद्रासन


 विधि :-

       खड़े हो जाएं दोनों हाथों को कान  से स्पर्श  कराते हुए सिर के ऊपर ले जाएं, एवं उंगलियों को आपस में फंसा ले। अब जो कि एक पैर पर संतुलन स्थापित करना है अतः एक पैर डायना पर पूरा ध्यान केंद्रित कर कमर के ऊपर के भाग को सामने की तरफ झुकाते हुए बाएं पैर को पीछे ले जाए इस प्रकार से छाती पीट और बाएं पैर एक सीध में ही हो जाएंगे । अंतिम अवस्था में दाहिने पैर पर ही पूरा संतुलन रहेगा। अनुकूलता अनुसार रोके और वापस मूल अवस्था में आ जाएं। यही प्रक्रिया दूसरे पैर से भी करें।

समय:-

  •  झुकते समय सांस छोड़ें। अंतिम समय सांस सामान्य रखें। 
  • एक पैर से दो से तीन बार करें।

लाभ:-

  •  पैरों की मांसपेशियों को मजबूत प्रदान करता है ।
  • पैरों के होने वाले घुटनों के दर्द को लाभ पहुंचाता है।
  •  समस्त शरीर में और जीवन में संतुलन को परिभाषित करता है।
  •  मन की चंचलता को रोकता है।

 सावधानी:-

  •  यह आसन उच्च रक्तचाप वालों को नहीं करना चाहिए।


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