षड्दर्शन का सामान्य परिचय || दर्शन कितने प्रकार के होते हैं || भारतीय षड्दर्शन

 

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भारतीय षड्दर्शन 

     दर्शन का अंग्रेजी शब्द फिलॉस्फी हैं। फिलॉस्फी शब्द लैटिन भाषा के 2 शब्दो फिलॉ + सैफिया से मिलकर बना है। फिलॉ शब्द का अर्थ होता है प्रेम, सैफिया शब्द का अर्थ है ज्ञान, दर्शन दृश धातु से बना है।


षड्दर्शन 6 प्रकार के होते हैं–

1. न्याय दर्शन
2. वैशेषिक दर्शन
3. संख्या दर्शन
4. मीमांसा दर्शन
5. योग दर्शन
6. वेदांत दर्शन ( उत्तर मीमांसा )


सांख्य दर्शन:-

     न्याय दर्शन के रचयिता महर्षि गौतम हैं। न्याय दर्शन तर्क पर आधारित है इन को मानने वाले आस्तिक कहलाते हैं, तथा इनका पूर्ण विश्वास ईश्वर तथा कर्म में है। इसमें ईश्वर को परमात्मा कहा गया है।


वैशेषिक दर्शन:-

     इस दर्शन के रचयिता महर्षि कपिल है। इसमें प्रकृति व पुरुष के हमारे जीवन में उपस्थिति का उल्लेख किया गया है। जिसमें व्यक्ति का तीनों गुणों का समावेश है (सत्व, रजस, तमस) सांख्य दर्शन के अनुसार सृष्टि का निर्माण प्रकृति व पुरुष से हुआ है।


मीमांसा दर्शन:-

     मीमांसा दर्शन के रचयिता महर्षि जैमिनी है । इस दर्शन में कुल 16 अध्याय हैं जिसमें से 12 अध्याय क्रम वृद्ध लिखे गए हैं। सूत्र संख्या के बारे में विभिन्न मत है। लेकिन 2745 सूत्रों की संख्या को ही अधिक मान्यता दी गई है।


योग दर्शन:-

      योग दर्शन के रचयिता महर्षि पतंजलि हैं। योग दर्शन को व्यवहारिक दर्शन माना जाता है। यह दर्शन सांख्य दर्शन के विभिन्न मतों का समर्थन करता है, और मोक्ष की प्राप्ति को ही जीवन का लक्ष्य मानता है। योग दर्शन में योगाभ्यास को अत्यधिक मानते हुए अष्टांग योग के विभिन्न अंगों का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है।


वेदांत दर्शन ( उत्तर मीमांसा) :-

     वेदांत शब्द का अर्थ है वेदों का अंत उपनिषदों को भी वेदांत कहा गया है, क्योंकि उपनिषद भी वेदों के अंतिम भाग हैं। वेदांत दर्शन को उत्तर मीमांसा भी कहा गया है । ब्रह्मसूत्र को वेदांत दर्शन का आधार माना जाता है । (महर्षि व्यास)


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