Yoga syllabus hindi || मानव – शरीर संस्थान पर योग का प्रभाव || Effect of Yoga on the Human Body Institute.

 Yoga syllabus hindi 

 मानव – शरीर संस्थान पर योगाभ्यास का प्रभाव 

 Effect of Yoga on the Human Body Institute.

     मानव- शरीर विभिन्न संस्थानों से मिलकर बना है । ‘ संस्थान ‘ हमारे अंगों की एक ऐसी व्यवस्था होती है जिसमें समस्त अंग आपस में एक दूसरे पर निर्भर करते हैं तथा व्यवस्थित प्रक्रिया के अन्तर्गत कार्य करते हैं । ये विभिन्न संस्थान आपस में एक – दूसरे से जुड़े रहते हैं । मानव – शरीर में निम्नलिखित संस्थान होते हैं –

  1. अस्थि संस्थान ( Skeleton System ) 
  2. मांसपेशी संस्थान ( Muscular System )
  3. रक्त – प्रवाह संस्थान ( Circulatory System ) 
  4. श्वसन संस्थान ( Respiratory System ) 
  5. पाचन संस्थान ( Digestive System ) 
  6. स्नायू संस्थान ( Nervous System ) 
  7. ग्रंथि संस्थान ( Endocrine System ) 
  8. उत्सर्जन संस्थान ( Excretory System ) 
  9. प्रजनन संस्थान ( Reproductory System ) 

     इन विभिन्न संस्थानों की सक्रियता में वृद्धि एवं इनके स्वास्थ्य को बनाए रखने में योग का महत्त्वपूर्ण योगदान है । विविध प्रकार के योगाभ्यास से ‘ मानव – शरीर संस्थान ‘ पर निम्न प्रकार के प्रभाव दृष्टिगोचर होते हैं।

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अस्थि – संस्थान पर योग का प्रभाव : –

     अस्थि – संस्थान सम्पूर्ण शरीर को आधार प्रदान करने का कार्य करता है । हमारे शरीर में 206 अस्थियाँ होती हैं । ये अस्थियाँ खनिज – लवण तथा कार्बोनिक पदार्थों से बनी होती है और आकृति तथा आकार में भिन्न – भिन्न होती हैं । अस्थि – संस्थान कोमल अंगों ( मस्तिष्क , हृदय , फेफड़े आदि ) को सुरक्षा प्रदान करने , उत्तोलन एवं आधार आदि देने का महत्त्वपूर्ण कार्य करता है । अस्थि संस्थान पर नियमित योगाभ्यास से निम्न प्रभाव पड़ते हैं-

  1. जोड़ों में लचीलापन , 
  2. दोषों जैसे – कुबड़ापन , चपटा पैर , मेरुदण्ड का टेढ़ा होना आदि के निराकरण में सहायता , 
  3. अस्थियों से सम्बन्धित रोगों – आर्थराइटिस , ऑस्टियोपोरोसिस , सन्धिवात , गठिया आदि रोग दूर होते हैं , 
  4. अस्थियों की लम्बाई में वृद्धि , 
  5. शारीरिक कार्यक्षमता में अभिवृद्धि । 
  6. अस्थियों और लिगामेण्ट्स में अधिक दबाव एवं सहने की क्षमता उत्पन्न करना । 

 

रक्त प्रवाह संस्थान पर योग का प्रभाव : –

     कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है , जिसकी आपूर्ति भोजन से होती है । शरीर की मांसपेशियों को पोषाहार तथा प्राणवायु की अत्यन्त आवश्यकता होती है । रक्त प्रवाह संस्थान ही रक्त के द्वारा पोषाहार तथा प्राणवायु को मांसपेशियों तक पहुँचाता है । इस संस्थान पर नियमित योग – अभ्यास करने से जो प्रभाव पड़ते हैं , वे निम्नांकित हैं –

  1. हृदय की धड़कन में नियमितता ।
  2.  स्ट्रोक के आयतन में वृद्धि । 
  3. हानिकारक कोलेस्ट्रोल के स्तर में कमी तथा अच्छे कोलेस्ट्रोल H.D.L में वृद्धि 
  4. केशिकाओं की संख्या तथा कार्य – कुशलता में वृद्धि । 
  5. लाल रक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि होना ।
  6.  श्वेत रक्त कणिकाओं में वृद्धि । 
  7. थकान में कमी । 
  8. रक्त में वसा के स्तर का नियमन अर्थात् कोलेस्ट्रोल , ट्राइग्लिसराइड्स , एच.डी.एल. आदि की अनियमिताएं दूर हो जाती है । 
  9. पुनः शक्ति – प्राप्ति समय ( Recovery time ) शीघ्रता से होना । 
  10. रोग – प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि । 

 

श्वसन- संस्थान पर योग का प्रभाव : –

     श्वसन तन्त्र का कार्य ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कार्बनडाई ऑक्साइड को बाहर निकालना है । ऑक्सीजन शरीर को शक्ति तथा अनुकूल तापमान देने में आवश्यक है । योग के नियमित अभ्यास श्वसन तन्त्र पर निम्न प्रभाव डालते हैं-

  1. श्वसन क्रिया सुचारू करना ।
  2. डायाफ्राम और मांसपेशियों में मजबूती । 
  3. असक्रिय वायु – कोशिकाएँ सक्रिय हो जाती हैं । 
  4. अवशिष्ट वायु के आयतन में वृद्धि । 
  5. फेफड़ों और छाती के आकार में वृद्धि । 
  6. हृदय एवं श्वास सम्बन्धी रोगों में अत्यन्त लाभप्रद ।
  7. श्वसन संबंधी रोगों का निराकरण होता है जैसे – सर्दी – खाँसी , जुकाम , एलर्जी , श्वास रोग , साइनस एवं कफ रोग दूर होते हैं ।
  8. थॉयराइड एवं टॉन्सिल आदि रोग दूर होते हैं । 
  9. जीवनी शक्ति में वृद्धि । 

 

मूत्र – संस्थान पर योग का प्रभाव : –

    मानव शरीर से अपशिष्ट हानिकारक द्रव पदार्थों एवं रसायनों का उत्सर्जन ‘ मूत्र संस्थान ‘ के माध्यम से होता है । यह यूरिक एसिड , टॉक्सिन आदि के उत्सर्जन से रक्त के शोधन का कार्य भी करता है । मूत्र – संस्थान पर नियमित योगाभ्यास करने से निम्न प्रभाव पड़ते हैं । 

  1. कार्यक्षमता में बढ़ोतरी । 
  2. गुर्दो से संबंधित बीमारियों से बचाव । 
  3. शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखना । 
  4. अपशिष्ट पदार्थों ( मलमूत्र ) का सम्यक् निष्कासन ।

 

पाचन संस्थान पर योग का असर : –

     पाचन संस्थान का कार्य हमारे आहार द्वारा ग्रहण किए गए भोजन को तरल पदार्थ में परिवर्तित करके रक्त में अवशोषण के माध्यम से शरीर को ऊर्जा प्रदान करना है ।

  1. पाचनक्रिया को सुचारू करना । 
  2. भूख में बढ़ोत्तरी । 
  3. कब्ज का निवारण । 
  4. भोजन के पाचन एवं अवशोषण में कार्यकुशलता । 
  5. शरीर के आवश्यक तत्त्वों के भंडारण में वृद्धि । 
  6. ग्रंथियों द्वारा कुशलतापूर्वक कार्य – निष्पादन । 
  7. पाचन तंत्र संबंधी रोगों को दूर करने में सहायक – गैस , कब्ज , अम्लपित्त , मधुमेह आदि रोग दूर होते हैं ।
  8.  आमाशय , अग्न्याशय , यकृत , प्लीहा , आँत का आरोग्य बढ़ता हैं।

 

स्नायु संस्थान पर योग का प्रभाव :-

     स्नायु संस्थान शरीर के विभिन्न अंगों को नियन्त्रित तथा उनकी सही देखभाल एवं उनके सही संचालन का कार्य करता है । मानव शरीर में सूक्ष्म नाड़ियों या स्नायुओं का जाल फैला रहता है । उन्हीं नाड़ियों के माध्यम से अनुभूति बोध एवं ज्ञान भी होता है । यह तन्त्र आन्तरिक एवं वातावरण के परिवर्तन के साथ सामंजस्य करने का भी कार्य करता है ।

  1. स्नायु तन्तुओं को सबल एवं सक्रिय रखना । 
  2. मानसिक क्षमता में वृद्धि । 
  3. भावनात्मक एवं क्रियात्मक पक्ष में सन्तुलन । 
  4. नकारात्मक चिन्तन में परिवर्तन एवं सकारात्मक चिन्तन में वृद्धिा।
  5. कम्पवात , स्नायु दुर्बलता आदि रोगों को दूर करता है ।
  6. योग से डर , भय , निराशा , तनाव , चिन्ता के भावों में कमी एवं उत्साह , रुचि , निर्भयता एवं प्रसन्नता के भावों में वृद्धि होती है । 
  7. नकारात्मक भावों जैसे – क्रोध , हताशा , निराशा एवं उदासीनता में कमी ।

 

 ग्रन्थि संस्थान पर योग का प्रभाव : –

     अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से विभिन्न हर्मोन्सों का स्राव होता है । ये नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ भी कहलाती हैं । हर्मोन्स तंत्रिकाओं के साथ मिलकर शरीर की अधिकांश क्रियाओं का नियमन करते हैं । मानव शरीर में पिट्यूटरी , थायराइड , पैराथायराइड , थाइमस , एड्रीनल आदि प्रमुख ग्रन्थियाँ हैं । ग्रन्थि संस्थान पर योग से पड़ने वाले प्रभाव हैं-

  1. ग्रन्थियों से हार्मोन्स का सम्यक् स्राव एवं रक्त में उचित स्तर बनाने में सहायक । 
  2. चयापचय क्रिया को स्वस्थ बनाना । 
  3. आयु के अनुरूप शारीरिक वृद्धि एवं विकास ।

 

मांसपेशी संस्थान पर योग का प्रभाव :- 

     मानव शरीर के विभिन्न अंग एवं अवयव कोशिकाओं एवं ऊतकों से निर्मित हैं , ये कोशिकाएँ तथा ऊतक आदि मिलकर मांसपेशियों का निर्माण करते हैं । मांसपेशियाँ हमारे आधारभूत ढाँचे ( अस्थियों ) को निश्चित आकार सुरक्षा एवं गतिशीलता प्रदान करते हैं । वास्तव में मांसपेशियों के अभाव में हम निर्जीव वस्तु की भाँति केवल एक स्थान पर बैठे रह जाते । योग से मांसपेशियों पर निम्न प्रभाव पड़ते हैं –

  1. मांसपेशियों को मजबूत बनाना । 
  2. मांसपेशियों में लचीलापन लाना । 
  3. शारीरिक सौष्ठव को बनाए रखना । 
  4. मोटापा , कमजोरी आदि में लाभप्रद । 

 

प्रजनन संस्थान पर योग का प्रभाव :- 

    प्रकृति ने सभी प्राणियों में वंशवृद्धि करने की क्षमता प्रदान की है , जिससे वह अपने समान ही जीव को उत्पन्न कर सकता है । मानव एवं अन्य सभी प्राणियों का यह गुण ‘ प्रजनन ‘ कहलाता है । प्रजनन क्षमता को संभव बनाने वाले मानव शरीर के सभी अंग – उपांग ‘ प्रजनन तन्त्र ‘ कहलाता है । योग के नियमित अभ्यास से प्रजनन संस्थान पर निम्न महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ते हैं –

  1. प्रजनन अंगों की कार्यक्षमता में वृद्धि । 
  2. नपुंसकता एवं बाँझपन को दूर करने में सहायक ।
  3. सम्बन्धित यौन रोगों के उपचार में सहायक ।
  4. मूत्ररोग , धातुरोग , शुक्रक्षय आदि दूर होते हैं । 

 

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