Yoga syllabus hindi || शरीर रचना एवं शरीरक्रिया विज्ञान || anatomy and physiology.

 Yoga syllabus hindi  

शरीर रचना एवं शरीरक्रिया विज्ञान  Anatomy and Physiology.

     योग के विविध अभ्यासों को नियमित रूप से करते – करते बच्चों ‘ शरीर रचना एवं शरीर क्रिया विज्ञान ‘ को जानने एवं समझने सम्बन्धी जिज्ञासाएं उठने लगती हैं । विशेषतः आसन एवं प्राणायाम करते समय बच्चे यह जानने का प्रयास करते हैं कि जिन अंगों या संस्थानों पर आसनों का प्राणायाम से प्रभाव पड़ते हैं , उनकी संरचना कैसी होगी । अत : बच्चों को इस संदर्भ में विशेष मार्गदर्शन देना जरूरी है । इस हेतु ‘ शरीर रचना एवं क्रिया विज्ञान की पुस्तकों अथवा चार्टस आदि का प्रयोग किया जा सकता है । इससे बच्चे रूचि के साथ सीखते तो हैं ही साथ ही उनके सीखने की प्रक्रिया भी सरल हो जाती है । विविध योग अभ्यासों में मेरुदण्ड का विशेष महत्त्व है । 

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मेरुदंड ( Spinal Cord ) सामान्य जानकारी :-

      शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए मेरुदंड का विशेष महत्त्व है । जब व्यक्ति उठने – बैठने- सोने – लिखने – पढ़ने – चलने आदि में कंकालतंत्र सम्बन्धी नियमों का पालन नहीं करता है तो उसमें अनेक शारीरिक दोषों के अतिरिक्त मानसिक दोष भी उत्पन्न हो जाते हैं जैसे –

  • मेरुदण्ड सम्बन्धी दोष ( टेढ़ा – मेढ़ा होना , अधिक झुकाव होना आदि ) 
  • आन्तरिक अंगों एवं मांसपेशियों में दर्द , खिंचाव सम्बन्धी गड़बड़ी हो जाना । 
  • सिरदर्द , थकान एवं तनाव का होना । 

     अत : मेरुदण्ड को सीधा रखकर उक्त परेशानियों से बचा जा सकता है । योग के अनुसार मेरुदंड सीधा और लचीला होना चाहिए । विविध प्रकार के आसन मेरुदंड को सीधा लचीला बनाए रखने में अत्यन्त सहायक हैं ।        

     आगे आसनों का एक प्रारूप दिया गया है । जिसमें मेरुदंड को आगे – पीछे झुकाने , ऊपर खींचने , नीचे झुकने , अगल – बगल से खींचने से सम्बन्धित आसनों का उल्लेख किया गया है । योगासन व प्राणायाम मांसपेशियों व हड्डियों को सुदृढ़ व लचीला बनाने के साथ इनका मेटाबोलिज्म ठीक करके अस्थि संस्थान व मेरूदण्ड को क्रियाशील , संतुलित व स्वस्थ रखने में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।

  •  चक्रासन , उष्ट्रासन , भुजंगासन आदि में पीछे की ओर झुकाव रहता है । 
  • योगमुद्रा , पश्चिमोत्तानासन , हलासन आदि में आगे की ओर खिंचाव रहता है । 
  • कोणासन , पार्श्ववृत्तकोणासन , में भुजाओं की ओर झुकाव रहता है । 
  • ताड़ासन , सरल वृक्षासन में ऊपर की ओर झुकाव रहता है । 
  • शवासन से सम्पूर्ण कंकाल – तंत्र को सही स्थिति में रखा जाता है साथ ही स्नायु तन्तुओं के दोषों ( तनाव आदि को ) दूर करने में सहायता मिलती है । 

     इस प्रकार ये विविध आसन हमें चित्र : मानव कंकाल तंत्र उचित रीति से उठना , बैठना , लिखना , चलना आदि तो सिखाते हैं ही साथ ही एक लम्बे समय तक किसी एक स्थिति में आरामपूर्ण ढंग से कैसे कार्य किया जाए – इसमें भी विशेष मदद देते हैं । 

     इस रूप में योग मन : कायिक पक्ष ( Psychosomatic )  के विकास पर जोर देता है । दूसरे शब्दों में तन – मन के मध्य सन्तुलन बनाने का भी कार्य करता है । में मानव शरीर संस्थान पर योग के प्रभाव का उल्लेख किया गया है । 

     संक्षेप में कह सकते हैं कि शिक्षक मेरूदण्ड सम्बन्धी यौगिक जानकारी को समझकर , व्यवहार रूप में अनुपालन कर बच्चों को उचित आसन व कंकाल तंत्र आदि की संक्षिप्त जानकारियाँ अवश्य दें । 

आसन के सही तरीके :- 

      नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं , जो उठने – बैठने की सही स्थिति को दर्शाते हैं –

 

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उठने – बैठने की सही स्थिति

 

 

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