Lavangadi vati in Hindi || जाने क्यों हैं ये इतनी कारगर औषधि कफ जैसे रोगों के लिए

Lavangadi vati in Hindi 

 जाने क्यों हैं ये इतनी कारगर औषधि कफ जैसे रोगों के लिए

 

     नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम बताने वाले हैं । आयुर्वेदिक औषधि Lavangadi vati in Hindi के बारे में। इस आर्टिकल में आपको बताएंगे लवंगादि वटी के क्या फायदे हैं। इसका सेवन क्यों और कब करना चाहिए तथा इसके सेवन करने से क्या फायदा होता है, और क्या इसके साइड इफेक्ट है तो आइए जानते हैं Lavangadi vati के बारे-

लवंगादि वटी क्या हैं ? What is Lavangadi vati ? –

 

     लवंगादि वटी आयुर्वेदिक औषधि है, जो कफ का समन करती हैं। इस औषधि का मुख्य घटक लौंग होता है। जिस की तासीर गर्म होती है । इसी वजह से यह लंबे समय से  छाती में जमा हो गए कफ को बाहर निकालती हैं।  गीली तथा सूखी खांसी को लवंगादि वटी के सेवन से ठीक किया जा सकता है  ।

यह औषधि श्वास की नली में जमे हुए कफ को निकालकर श्वास रोगों में लाभ देती हैं। जुकाम, खांसी और कफ को समाप्त करने के लिए लवंगादि वटी एक उत्तम औषधि है। इस औषधि की 1 या 2 दिन गोली दिन में चूसने से ही व्यक्ति को बहुत आराम मिलता है।

 

लवंगादि वटी के प्रमुख घटक ( components of Lavangadi Vati) –

  • लौंग
  • बहेड़े का छिलका
  • पीपल
  • सकरतिगार
  • काकड़ासिंगी
  • अनार का सूखा छिलका
  • दालचीनी
  • खैरसार या कत्था
  • सत-मुलेठी
  • मुनक्का
  • आक के फूल
  • नौसादर
  • कपूर
  • सुहागे की खील

 

 

लवंगादि वटी कैसे बनाते हैं (How to make Lavangadi Vati) :-

 

     इस औषधि को बनाने के लिए मुनक्का और आक के फूल को कूट कर इनका क्वाथ बना ले। जब चौथाई जल शेष रह जाए तो इसमें नौसादर, कपूर, मुलेठी और सुहागे की खील मिला दे। इसके बाद बाकी बची हुई औषधियों को कूटकर अच्छे से छान ले और इस क्वाथ में मिला दें। छोटी-छोटी गोलियां बना कर सूखा दे इसके बाद इस औषधि का प्रयोग करें।

 

Lavangadi vati in Hindi || जाने क्यों हैं ये इतनी कारगर औषधि कफ जैसे रोगों के लिए

लवंगादि वटी के फायदे (Benefits of Lavangadi Vati) :-

 

खांसी में –

 

     बार -बार खांसी का होना, गले की खराबी के कारण खांसी लंबे समय तक चलते रहना, यह औषधि खांसी से संबंधित इन सभी रोगों के लिए उत्तम हैं । कई बार तो ऐसा होता है कि खांसी की वजह से व्यक्ति का हाल बेहाल हो जाता है जिस कारण उसके  स्वसन तंत्र पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है।
     खांसी कफ वाली हो या सूखी खांसी हो इसको सीखें सेवन से इन्हें समाप्त किया जा सकता है इस औषधि का सेवन कब का समापन करती हैं और व्यक्ति को खांसी से छुटकारा दिलाती हैं यदि खांसी के साथ-साथ जुखाम में भी लाभ करती हैं।

 

छाती से जुडी समस्याओं में –

 

     कफ का जमा होना तो एक सामान्य बात है परंतु जब यह कफ छाती में जड़ जमा लेता है तो इससे छाती में बहुत ज्यादा दर्द  तथा सांस लेने में कठिनाई जैसी कई समस्याएं सामने आने लगती है । लवंगादि वटी में लौंग के साथ-साथ और भी कई ऐसी जड़ी बूटियों का प्रयोग किया गया है जिन की तासीर अधिक गर्म होती हैं। अगर कफ से पीड़ित व्यक्ति इसका सेवन करता है तो उसका कफ पतला होकर धीरे-धीरे बाहर निकलने लगता है।

 

श्वास रोगों के लिए –

 

     जब कफ की मात्रा अधिक हो जाती हैं तो यह स्वसन तंत्र की नलियों में जमा होने लगता है जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती हैं।  इसी प्रकार के कफ के कारण होने वाले सांप रोगों को लवंगादि वटी के सेवन से खत्म किया जा सकता है। श्वास संबंधी संक्रमण में भी यह उपयोगी है।

 

मुंह के छाले –

 

     अगर व्यक्ति के मुंह में छाले हो गए हैं तो वह लवंगादि वटी की एक से दो गोली मुंह में डालकर चूस ले , तो इससे छालो में बहुत आराम मिलता है।

 

लवंगादी वटी के अन्य फायदे :-

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
  • पित्त को बढ़ाये
  • गले की खराश को खत्म करें
  • सिर दर्द में आराम

 

 

लवंगादि वटी की सेवन विधि Lavangadi vati ki sevan vidhi :-

 

  • 1-1 गोली दिन में  मुंह में 5 से 6 बार  चूसे ले ।

 

 

सावधानियाँ :-

  • पित्त प्रधान वाले व्यक्ति को इस औषधि का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए।
  • गर्भवती स्त्री को सेवन से बचना चाहिए। या चिकित्सक की सलाह से लवंगादि वटी का सेवन करें।
  • इस औषधि का सेवन अधिक मात्रा में ना करें।
  • अगर आप पहले से ही किसी अन्य रोग की दवा का सेवन कर रहे हैं तो लवंगादि वटी का सेवन  डॉक्टर की सलाह से ही करें।
  • लवंगादि वटी का सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
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