सारिवादि वटी फ़ायदे, सेवन विधि || Patanjali Divya Sarivadi vati in Hindi.

 

सारिवादि वटी फ़ायदे, सेवन विधि 
Patanjali Divya Sarivadi vati in Hindi

 

    नमस्कार दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं Patanjali Divya Sarivadi vati in Hindi के बारे में जो कि एक आयुर्वेदिक औषधि हैं। यह औषधि परम पूजनीय स्वामी रामदेव जी एवं आचार्य श्री बाल किशन जी की देखरेख में तथा पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट में तैयार की गई है। यह औषधि कान के सभी लोगों को दूर करने के लिए बनाई गई हैंइसके अलावा यह औषधि ओर भी कई बीमारियों में फायदेमंद है, जो हम आज आपको नीचे आर्टिकल में बताएंगे –

सारिवादि वटी क्या हैं ( Sarivadi vati kya hain ) :-

 

     यह औषधि सारिवा अर्थात अनंतमूल से बनाइ जाती हैं। सारिवादि वटी का मुख्य उपयोग कान के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। कान के रोग जैसे कि कान का गूंजना, कान का बहना, कम सुनाई देना, आदि समस्याओं के लिए यह प्रभावकारी आयुर्वेदिक औषधि है
     इसके अलावा भी है कई प्रकार रोगों में काम करती हैं जैसे कि रक्तपित्त की समस्या, टी.वी. रोग, श्वास रोग, हृदय रोग आदि समस्याओं में यह फायदेमंद है नपुंसकता, पुराना बुखार, मिर्गी रोग, जी मिचलाना और भूख कम लगना, शरीर में ऐंठन एवं मरोड़ की समस्या आदि मैं यह औषधि लाभकारी है ।

 

सारिवादि वटी के मुख्य घटक Contents of Sarivadi vati :-

 

  • सारिवा (अनंतमूल)
  • मुलेठी
  • कूठ
  • दालचीनी
  • तेजपत्र
  • इलायची
  • नागकेसर
  • प्रियंगु
  • कमल के फूल
  • गिलोय
  • लोंग
  • हरड
  • आंवला
  • बहेड़ा
  • अभ्रक भस्म
  • लोह भस्म
  • भांगरे का रस
  • श्वेत अर्जुन की छाल का क्वाथ
  • जावके क्वाथ
  • माकोय के रस
  • गुन्जामूल का क्वाथ

 

 

सारिवादि वटी बनाने की विधि How to make Sarivadi vati :-

 

     सारिवादि वटी बनाने के लिए सबसे पहले इन सभी औषधियों का चूर्ण बना लेते हैं अब इस चूर्ण में सारी भस्म डाल ले । अब बताए गए इसमें सभी रस और क्वाथ में इस मिश्रण को भावना देकर गोलियां बना लें तथा फिर उन्हें सुखा दें। अब यह पूरी तरह से तैयार हो गई है और अब इसका सेवन किया जा सकता है।

 

सारिवादि वटी के फायदें :-
Benefits of Sarivadi vati :-

कान के रोग खत्म करें –

 

     सारिवादी वटी मुख्य रूप से कान के  रोगों को समाप्त करती हैं । कान बहना, कान का गूंजना, कम सुनाई देना, कान में दर्द होना जैसी और भी कान से जुडी बहुत सारी परेशानियों को इस आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करके समाप्त किया जा सकता हैं। तम्बाखू सूंघने से उत्पन्न या तम्बाखू विष के कारण यदि कान में किसी  प्रकार की समस्या आई हैं, तो उसे इसका सेवन करके उसे ठीक किया जा सकता हैं|

 

    यदि कान से जुडी हुई नाड़ी मृत हो गयी हैं या ल कान का छेद ख़राब हो गया हो। इस आयुर्वेदिक औषधि का सेवन करने से कोई मुख्य फायदा नही हैं|

 

रक्तपित्त की समस्या में –

     रक्त पित्त जिसे नकसीर भी कहते हैं। यह इसे दूर करने में फायदेमंद है। रक्तपित्त की समस्या सर्दियों के मुकाबले गर्मियों में अधिक देखी जाती हैं। किसी व्यक्ति के द्वारा गर्मी में किसी गरम चीज़ का सेवन अधिक करने से  नाक या अन्य किसी अंग से रक्त आना शुरू हो जाता हैं। इस स्थिति में यह सारिवादि वटी काफी फादेमंद हैं।

 

टी.बी. रोग में –

 

     जब हमें खांसी हो जाते हैं और उसका इलाज समय पर नहीं किया जाता है तो यह खांसी आगे चलकर टी.वी. का रूप धारण कर लेती हैं। इस रोग में खांसी के समय म्यूकस और कभी-कभी तो खून भी आने लगता है। टी०बी० के रोगियों को रात में पसीना आने लगता है इस बीमारी को समाप्त करने में पतंजलि सारिवादि वटी उपयोगी हैं।

 

जीर्णज्वर को दूर करें –

 

    दिव्या सारिवादि वटी किसी भी प्रकार के पुराने से पुराने बुखार को और साधारण बुखार दोनों को ही जड़ से खत्म करने का काम करती हैं। इसके जो औषधीय गुण होते हैं वह बुखार के संक्रमण को खत्म कर के रोगों से लड़ने में सहायक होते हैं।

 

नपुसंकता दूर करें में –

     इस औषधी का प्रयोग पुरुषो के द्वारा किये जाने पर नपुसंकता का नाश तो होता ही है और हर पुरुष इस औषधी के सेवन से संतान प्राप्त कर सकता हैं।

 

मिर्गी रोग को समाप्त करने में –

     मिर्गी रोग तंत्रिका तंत्र से जुड़ा हुआ  विकार हैं जिसमे रोगी को दौरा पड़ने लगता हैं। इस समस्या को समाप्त करने में सारिवादी वटी एक अच्छी औषधि होती हैं। इसके सेवन से तंत्रिका तंत्र से जुड़े सभी विकार को समाप्त किया जा सकता हैं।

 

मदात्यय रोग में लाभ दें-

 

     इस रोग में जी का मचलना और भूख बहुत कम लगना आदि जैसी कई समस्याएँ होती हैं। शरीर में ऐंठन और मरोड़ भी इसका एक लक्षण हैं। इन परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए इसका प्रयोग करें। यह इन सभी में काफी फादेमंद होती हैं।

 

अन्य फायदें (Other benefits of patanjali Sarivadi vati) –

 

  • प्रमेह रोगों में लाभदायक
  • श्वास रोगों में
  • ह्रदय को मजबूती दे
  • अर्श रोग में लभदायक
  • मधुमेह में लाभकारी

 

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दिव्य सारिवादि वटी के सेवन की विधि और मात्रा :-
Doses of Patanjali Sarivadi vati :-

  • 1-1 गोली दिन में २ बार ले।
  • धारोष्ण दूध, चन्दन के अर्क या शतावरी के क्वाथ के साथ भी इस का सेवन किया जा सकता हैं

 

सावधानियाँ Precautions of Sarivadi vati :-

 

  • गर्भवती स्त्री को इस वटी के सेवन से बचना चाहिए।
  • इस वटी का सेवन चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
  • यदि आप अन्य किसी रोग से ग्रसित हैं तो आप चिकित्सक   की सलाह के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।
 
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