Asthma disease-hindi – गर्म हवाएं बढ़ा सकती हैं अस्थमा के लक्षण

 Asthma disease – गर्म हवाएं बढ़ा सकती हैं अस्थमा के लक्षण

 

     विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार , 2019 में विश्व में 26 करोड़ 20 लाख लोग अस्थमा के शिकार थे और इसके चलते 4 लाख 61 हजार लोगों ने अपनी जान गंवा दी । विशेषज्ञों के अनुसार , सही जागरुकता से दुनियाभर में इन आंकड़ों में कमी लाई जा सकती है । इसी को ध्यान में रखते हुए वर्ल्ड अस्थमा डे की इस साल की थीम ‘ क्लोजिंग गेप्स इन अस्थमा केयर ‘ रखी गई है । विश्व अस्थमा दिवस , हर साल गर्मियों में मई माह के पहले मंगलवार को मनाया जाता है । 

    गर्मियों के मौसम में वातावरण में अस्थमा के ट्रिगरों जैसे , वायु प्रदूषक , धूल , पराग कण , जानवरों की मृत त्वचा आदि की मौजूदगी बढ़ जाती है । अध्ययन कहते हैं कि गर्म और उमस भरी हवा में सांस लेने के चार मिनट में ही अस्थमा के लक्षण दिखाई दे सकते हैं । Asthma disease-hindi

एलर्जी भी बना सकती है दमा –
Allergies can also cause asthma-

     अस्थमा के कारण फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली श्वास नलिकाएं सूजकर अतिसंवेदनशील हो जाती हैं । उत्तेजना पैदा करने वाली हर चीज़ से उनमें सख्त प्रतिक्रिया होती है । इन चीजों को अस्थमा ट्रिगर्स कहते हैं । अस्थमा ट्रिगर के संपर्क में श्वास नलिकाओं की मांसपेशियां कड़ी होकर सिकुड़ जाती हैं । इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होना , खांसी आना तथा सीने में जकड़न महसूस होती है । अस्थमा के शिकार लोगों में रात के समय व्यायाम या अत्यधिक शारीरिक श्रम करते समय लक्षण अधिक गंभीर हो जाते हैं । शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिल पाने पर अस्थमा अटैक ट्रिगर हो जाता है , जो घातक हो सकता है । Asthma disease-hindi

      जो चीजें अस्थमा के लिए ट्रिगर का काम करती हैं वही एलर्जी भी करती हैं । जब एलर्जी वाली चीजों के संपर्क में आने पर अस्थमा अटैक होता है तो उसे एलर्जिक अस्थमा कहते हैं । कई पदार्थ जैसे वायु प्रदूषक , परागकण , धूल , पशुओं की मृत त्वचा कुछ सामान्य ट्रिगर हैं । कुछ लोगों में फूड एलर्जी से भी अस्थमा अटैक हो जाता है । जब शरीर एलर्जन के संपर्क में आता है तो प्रतिक्रिया देता है , कुछ लोगों में यह प्रतिक्रिया फेफड़ों और श्वासमार्ग पर असर डालती है , जिससे अस्थमा के लक्षण दिखाई देते हैं । एलर्जिक अस्थमा के लिए आनुवंशिक कारक बड़ी वजह है । Asthma disease-hindi

     इसके अलावा , अगर आपको एलर्जिक अस्थमा नहीं है , केवल एलर्जी है तो अस्थमा होने का खतरा 40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है । एक अनुमान के अनुसार , 25 फीसदी भारतीय एलर्जी से पीड़ित हैं । इनमें से पांच प्रतिशत लोगों की एलर्जी अस्थमा में बदल जाती है । Asthma disease-hindi

     गर्मियों में होने वाले 60 प्रतिशत अस्थमा अटैक पर्यावरण में उपस्थित एलर्जन्स के कारण होते हैं । श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट में रेस्पिरेटरी मेडिसिन से जुड़े डॉ . अनिमेष आर्य कहते हैं , ‘ वायु प्रदूषण अस्थमा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है । डब्ल्यूएचओ के अनुसार बीते दो दशकों से अस्थमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं , जिसकी बड़ी वजह वायु प्रदूषण है । आज विश्व की लगभग 92 प्रतिशत आबादी प्रदूषित स्थानों पर रह रही है । प्रदूषण , धूल और स्मोग के बीच लगातार रहने से लोगों को एलर्जी हो जाती है , जो बाद में अस्थमा बन जाती है । ‘ Asthma disease-hindi

 

“02 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हर साल दमा के कारण हो जाती है , विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार “

 

“40 लाख बच्चे भारत में हर साल अस्थमा के शिकार हो जाते हैं । दी लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ के अनुसार”

 

जोखिम के कारण due to Asthma –

अनुवाशिक कारकः 

जिनके माता – पिता दोनों को अस्थमा है , उनमें इसका खतरा 8-10 प्रतिशत तक और दोनों में से एक को है तो यह खतरा 6-8 प्रतिशत तक बढ़ जाता है । Asthma disease-hindi

खराब जीवनशैलीः

 शारीरिक सक्रियता की कमी , खराब खानपान , सेहत के प्रति लापरवाही भी अस्थमा का एक महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर है । 

 

एलर्जी और वायु प्रदूषणः 

एलर्जी और वायु प्रदूषण विश्वभर में अस्थमा का प्रमुख कारण है । Asthma disease-hindi

धूम्रपानः 

धूम्रपान करना या ऐसे व्यक्ति के निकट संपर्क में रहना , दमा की चपेट में आने का कारण बन सकता है ।

 

अन्य कारकः

रसायनों का एक्सपोजर , वायरल इन्फेक्शन ( सर्दी – जुकाम ) , तेज गंध वाले परफ्यूम , कई दवाओं का बुरा असर आदि । 

मानसिक तनाव : 

तनाव भी अप्रत्यक्ष रूप से अस्थमा का एक कारण हो सकता है । लगातार मानसिक तनाव से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है । Asthma disease-hindi

Asthma disease-hindi - गर्म हवाएं बढ़ा सकती हैं अस्थमा के लक्षण

कोरोना संक्रमण और अस्थमा-
Corona infection and asthma-

      कोरोना और दमा दोनों ही रोगों के कई लक्षण मिलते – जुलते हैं । गुरूग्राम स्थित नारायणा हॉस्पिटल के पल्मोनरी एंड स्लीप मेडिसिन विभाग से जुड़ी डॉ . शिबा कल्याण बिस्वाल कहती हैं , अस्थमा रोगियों के भी कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना अन्य लोगों जितनी ही है , पर उनमें जटिलताएं पैदा होने की आशंका बहुत अधिक है ।

      अस्थमा और कोरोना वायरस ये दोनों ही मरीज के फेफड़ों पर असर डालते हैं । अगरकोई मरीज गंभीर अस्थमा से पीड़ित है तो उसके फेफड़ों में सूजन हो जाती है , जिससे कोरोना के लक्षणों के गंभीर होने का खतरा बढ़ जाता है । यही वजह है कि अस्थमा के रोगी के लिए सभी सावधानियां बरतने के साथ टीका लगवाना बेहद जरूरी है । Asthma disease-hindi

     ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन के अनुसार , अस्थमा के उपचार में इस्तेमाल होने वाली एक दवाई , कोविड 19 के मरीजों की रिकवरी प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती है । यह अध्ययन दी लैन्सेट जर्नल में प्रकाशित हुआ है , जिसके मुताबिक इन्हेलर के जरिए ली जाने वाली ग्लूकोकोर्टिकॉयड दवा गंभीर कोविड और उसकी वजह से अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम कर सकती है । Asthma disease-hindi

     हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार , बीते दो वर्षों में हमारे यहां दमा और एलर्जी के मामले बढ़े हैं । एक ही मास्क को कई दिनों तक लगाने , मास्क को साफ न रखने और घटिया क्वालिटी के मास्क का इस्तेमाल करने को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है । यह बात भी सामने आई है कि लगातार मास्क के इस्तेमाल से फेफड़ों को ऑक्सीजन कम मिलती है , जिससे उनकी संकुचन की क्षमता प्रभावित होती है । साफ और अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें , खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर पूरी सावधानी बरतें ।

बच्चों में लगातार बढ़ रहे हैं मामले-

 प्रदूषण और बदलती जीवनशैली बच्चों पर भी बुरा असर डाल रही है । बच्चों को स्तनपान न करवाकर बोतल से दूध पिलाना भी उनमें एलर्जी बढ़ने का बड़ा कारण हैं । शहरों में वाहनों और कारखानों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषित वायु में सांस लेने के कारण धीरे – धीरे इनके कण श्वास नलिकाओं में जमा हो जाते हैं । बच्चों की श्वास नलिकाएं बहुत नाजुक होती हैं , जिससे पहले एलर्जी और बाद में दमा के शिकार हो जाते हैं । मेट्रो शहरों में रहने वाले बच्चों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है । इनके अलावा , एंटीबॉयोटिक दवाओं का बढ़ता चलन भी बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहा है । Asthma disease-hindi

 

अस्थमा से बचने के लिए रोज करें प्राणायाम-
Do Pranayama daily to avoid Asthma-

      समय पर सही जांच व बीमारी के लक्षण पाए जाने पर उचित दवाओं से इसे नियंत्रित किया जा सकता है । श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए 10 मिनट प्राणायाम बहुत कारगर है । इससे श्वास रोकने की क्षमता बढ़ती है और रक्त संचरण बेहतर होता । इसके साथ ही पैदल चलना भी काफी फायदेमंद रहता है । इन बातों का भी ध्यान रखना चाहिए : –

  • अगर गर्मियों में किन्हीं चीजों से एलर्जी बढ़ जाती है तो उसके लिए डॉक्टर से दवाई लें । 
  • ऐसे स्थानों पर जाने से बचें , जहां वायु प्रदूषण अधिक हो । दवाएं और इनहेलर साथ रखें ।
  •  डॉक्टर द्वारा सुझाई दवाएं समय पर लें । खुद से उपचार में बदलाव न करें । 
  • क्लोरीन की गंध से एलर्जी है तो स्वीमिंग पूल न जाएं । 
  • रात में खिड़कियां खोलकर ना सोएं ; एअरकंडीशन का प्रयोग करें ।
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